हर शख्स का जीना यहाँ आसान नहीं है
मुश्किल से मिले वो जो परेशान नहीं है,
हर शख्स से रखो न तुम उम्मीद ए वफ़ा
हर शख्स यहाँ पेशे से इन्सान नहीं है,
वो शहर बसाया जो कभी पुरखो ने मेरे
अब उस शहर में मेरी कोई पहचान नहीं है,
होने को तो हो सकता है हो जाए मुहब्बत
ऐसा भी मगर होने का इम्कान नहीं है,
उस शख्स से अच्छे की तवक्को नहीं साहब
जो अपनी ही गलती पे पशेमान नहीं है,
माँ बाप की इज्ज़त न लगे दाँव पे जिससे
उस मुहब्बत से मुझे कोई भी नुकसान नहीं है,
इस ज़माने में ज़रा रुक के संभल कर चलना
आगे का सफ़र इतना भी आसान नहीं है..!!
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