किसी दिन तो तू भी मुहब्बत हक़ीक़ी कर के देख
कैसे जीते है तेरे बगैर तू भी तो हम पर मर के देख,
यूँ कश्ती ए दिल के किनारे बैठ तू अंदाज़ा न लगा
किसी दिन इसकी गहराइयो में उतर कर के देख,
मुरझाई हुई सी तू एक दिन गुलो सा खिल जाएगी
एक बार महबूब की बाँहों में तू बिखर कर के देख,
पिघल कर तो देख किसी के प्यार में मोम की तरह
किसी के इंतज़ार में दीये की तरह जल कर के देख,
समझ आ जाएगी तुझे भी धड़कनो की सदा ज़रीन
किसी दिन इश्क़ की गली से तू गुज़र कर के देख..!!
~नवाब ए हिन्द
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