मेरा दिल बुराई से तू साफ़ कर दे
ऐ देने वाले मुझे माफ़ कर दे,
मेरी तरफ से हुई है खताएँ
ऐबों पर सत्तारी का एक लिहाफ़ कर दे,
तेरी तरफ़ से हुई है अताएँ
नेमतों पर शुक्र का एक गिलाफ़ कर दे,
दुनियाँ भी बनाएँ लोगो को मनाएँ
आखिरत भी मेरी तू एह्दाफ़ कर दे,
ना दुखाएँ नवाब दिल किसी का
ऐसे हमारे तू औसाफ़ कर दे..!!
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ग़ज़ल का हुस्न है और गीत का शबाब है वो…

मेरा ख़ामोश रह कर भी उन्हें सब कुछ सुना देना

तुम जानो तुम को ग़ैर से जो रस्म-ओ-राह हो…

ताअज्ज़ुब है अँधे आईना दिखा रहे है…

अज़ब मअमूल है आवारगी का…

कल तक ये फूल रूह ए रवाँ थे बहार के

वतन की सरज़मीं से इश्क़ ओ उल्फ़त हम भी रखते हैं

होंठों को फूल आँख को बादा नहीं कहा

लगा जब अक्स ए अबरू देखने दिलदार…

किसी से भी नहीं हम सब्र की तलक़ीन लेते है…


















