दर्द से दिल ने वास्ता रखा
वक़्त बदलेगा हौसला रखा,
रो दिए मेरे हाल पे पंछी
चुगने जब सिर्फ़ बाजरा रखा,
मैं परिंदा बना हूँ जब से तू
सरहदों से न वास्ता रखा,
धोका अक्सर मिले है अपनों से
अपनों से थोड़ा फ़ासला रखा,
ताकि निकलें नहीं मेरे आँसू
दर्द सहने का सिलसिला रखा,
मंदिरों मस्जिदों में ढूँढे कौन
इस लिए दिल में एक ख़ुदा रखा,
तोड़ देते जो हौसला आतिश
उन ख़यालों से फ़ासला रखा..!!
~आतिश इंदौरी
दस्त ए मुनइम मेरी मेहनत का ख़रीदार सही
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