वो तो गया ये दीदा ए ख़ूँ बार देखिए
दामन पे रंग ए पैरहन ए यार देखिए,
दिखला के वो तो ले भी गया शोख़ी ए ख़िराम
अब तक हैं रक़्स में दर ओ दीवार देखिए,
उक्ता के हम ने तोड़ी थी ज़ंजीर ए नाम ओ नंग
अब तक फ़ज़ा में है वही झंकार देखिए,
सीने में छुप गया है तुलू ए सहर के साथ
अब शाख़ ए दिल पे वो गुल ए रुख़्सार देखिए,
बर्क़ ए तपीदा बाद ए सबा शोला और हम
हैं कैसे कैसे उस के गिरफ़्तार देखिए,
पहले भी तेज़ रौ थे पर उस दिल नशीं के साथ
ये चश्म ए नम ये मस्ती ए रफ़्तार देखिए,
मजरूह के लबों से ये ख़ुश्बू न जा सकी
बख़्शी जो उस ने दौलत ए बेदार देखिए..!!
~मजरूह सुल्तानपुरी
डरा के मौज ओ तलातुम से हम नशीनों को
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