वही दर्द है वही बेबसी तेरे गाँव में मेरे शहर में
बे गमो की भीड़ में आदमी तेरे गाँव में मेरे शहर में,
यहाँ हर क़दम पे सवाल है वहां हर क़दम पे मलाल है
बड़ी उलझनों में है ज़िन्दगी तेरे गाँव में मेरे शहर में,
किसे दोस्त अपना बनाएँ हम किसे हाल ए दिल सुनाएँ हम ?
सभी गैर है सभी अज़नबी तेरे गाँव में मेरे शहर में,
है सभी की अपनी ज़रूरते कोई कैसे बाँटे मोहब्बतें ?
न ख़ुलूस है न है दोस्ती तेरे गाँव में मेरे शहर में,
न वो हुस्न है न हिज़ाब है न वो इश्क़ में तब ओ ताब है
न वो आबरू ए वफ़ा रही तेरे गाँव में मेरे शहर में,
मैं इलाज़ ए गम भी न कर सका तेरा जाम भी तो न भर सका
है हर एक मोड़ पे तिश्नगी तेरे गाँव में मेरे शहर में,
ये हसद जहाँ की नज़र में है गम ए दाना उन के जिगर में है
है सभी को प्यार से दुश्मनी तेरे गाँव में मेरे शहर में..!!
~अब्बास दाना
➤ आप इन्हें भी पढ़ सकते हैं










Discover more from Bazm e Shayari :: बज़्म ए शायरी -Hindi / Urdu Poetry, Ghazals, Shayari
Subscribe to get the latest posts sent to your email.


















