तुझे पुकारा है बे इरादा

तुझे पुकारा है बे

तुझे पुकारा है बे इरादा जो दिल दुखा है बहुत ज़ियादा, नदीम हो तेरा हर्फ़ ए शीरीं तो

फिर हरीफ़ ए बहार हो बैठे

फिर हरीफ़ ए बहार

फिर हरीफ़ ए बहार हो बैठे जाने किस किस को आज रो बैठे, थी मगर इतनी राएगाँ भी

हर सम्त परेशाँ तिरी आमद के क़रीने

हर सम्त परेशाँ तिरी

हर सम्त परेशाँ तिरी आमद के क़रीने धोके दिए क्या क्या हमें बाद ए सहरी ने, हर मंजिल

सोच बदल जाती है,हालात बदल जाते हैं

सोच बदल जाती है

सोच बदल जाती है,हालात बदल जाते हैं वक्त के साथ,लोगो के ख्यालात बदल जाते हैं, इस तरह चेहरे

उजड़े हुए हड़प्पा के आसार की तरह

उजड़े हुए हड़प्पा के

उजड़े हुए हड़प्पा के आसार की तरह ज़िन्दा हैं लोग वक़्त की रफ़्तार की तरह, क्या रहना ऐसे

निगाह ए यार के बदलने में कुछ देर नहीं लगती

निगाह ए यार के

निगाह ए यार के बदलने में कुछ देर नहीं लगती हसीं ख़्वाबों के जलने में कुछ देर नहीं

कोई सुनता ही नहीं किस को सुनाने लग जाएँ

कोई सुनता ही नहीं

कोई सुनता ही नहीं किस को सुनाने लग जाएँ दर्द अगर उठे तो क्या शोर मचाने लग जाएँ,

जानता हूँ कि तुझे साथ तो रखते है कई

जानता हूँ कि तुझे

जानता हूँ कि तुझे साथ तो रखते है कई पूछना था कि तेरा ध्यान भी रखता है कोई

मेरे उसके दरमियाँ ये राब्ता है और बस

मेरे उसके दरमियाँ ये

मेरे उसके दरमियाँ ये राब्ता है और बस उम्र भर एक दूसरे को सोचना है और बस, ज़िन्दगी

चल निकलती हैं ग़म ए यार से बातें क्या क्या

चल निकलती हैं ग़म

चल निकलती हैं ग़म ए यार से बातें क्या क्या हम ने भी कीं दर ओ दीवार से