उस गली के लोगों को मुँह लगा के पछताए

us gali ke logon ko munh laga ke pachhtaaye

उस गली के लोगों को मुँह लगा के पछताए एक दर्द की ख़ातिर कितने दर्द अपनाए, थक के

ये उजड़े बाग़ वीराने पुराने

ye ujde baag veerane puraane

ये उजड़े बाग़ वीराने पुराने सुनाते हैं कुछ अफ़्साने पुराने, एक आह ए सर्द बन कर रह गए

गुलशन की फ़ज़ा धुआँ धुआँ है

gulshan ki faza dhuaan dhuaan hai

गुलशन की फ़ज़ा धुआँ धुआँ है कहते हैं बहार का समाँ है, बिखरी हुई पत्तियाँ हैं गुल की

जहाँ हैं महबूस अब भी हम वो हरम सराएँ नहीं रहेंगी

jahan hai mahbus ab bhi hum wo haram saraayen nahi rahegi

जहाँ हैं महबूस अब भी हम वो हरम सराएँ नहीं रहेंगी लरज़ते होंटों पे अब हमारे फ़क़त दुआएँ

महताब सिफ़त लोग यहाँ ख़ाक बसर हैं

mahtab sifat log yahan khaaq basar hain

महताब सिफ़त लोग यहाँ ख़ाक बसर हैं हम महव ए तमाशा ए सर ए राह गुज़र हैं, हसरत

क्या क्या लोग गुज़र जाते हैं रंग बिरंगी कारों में

kya kya log guzar jaate hain rang birangi kaaro me

क्या क्या लोग गुज़र जाते हैं रंग बिरंगी कारों में दिल को थाम के रह जाते हैं दिल

तेरे माथे पे जब तक बल रहा है

tere maathe pe jab tak bal raha hai

तेरे माथे पे जब तक बल रहा है उजाला आँख से ओझल रहा है, समाते क्या नज़र में

हम ने दिल से तुझे सदा माना

hum ne dil se tujhe sada maana

हम ने दिल से तुझे सदा माना तू बड़ा था तुझे बड़ा माना, मीर ओ ग़ालिब के बाद

तू रंग है ग़ुबार हैं तेरी गली के लोग

tu rang hai gubar hai teri gali ke log

तू रंग है ग़ुबार हैं तेरी गली के लोग तो फूल है शरार हैं तेरी गली के लोग,

शहर वीराँ उदास हैं गलियाँ

shahar veeraan udas hai galiyan

शहर वीराँ उदास हैं गलियाँ रहगुज़ारों से उठ रहा है धुआँ, आतिश ए ग़म में जल रहे हैं