ऐ यक़ीनों के ख़ुदा शहर ए गुमाँ…

ae yaqino ke khuda shahar e gumaan kis ka hai

ऐ यक़ीनों के ख़ुदा शहर ए गुमाँ किस का है नूर तेरा है चराग़ों में धुआँ किस का

उस गुल को भेजना है मुझे ख़त…

us gul ko bhejna hai mujhe khat saba ke saath

उस गुल को भेजना है मुझे ख़त सबा के हाथ इस वास्ते लगा हूँ चमन की हवा के

मैंने मुद्दत से कोई ख़्वाब नहीं देखा है

maine muddat se koi khwab nahi dekha hai

मैंने मुद्दत से कोई ख़्वाब नहीं देखा है रात खिलने का गुलाबों से महक आने का, ओस की

हाए लोगों की करम फ़रमाइयाँ…

haay logo ki karam farmaaiyan

हाए लोगों की करम फ़रमाइयाँ तोहमतें बदनामियाँ रुस्वाइयाँ, ज़िंदगी शायद इसी का नाम है दूरियाँ, मजबूरियाँ, तन्हाइयाँ, क्या

फूल,खुशबू, कली की बात करें

fool khushboo kali ki baat kare

फूल,खुशबू, कली की बात करें प्यार की, आशिकी की बात करें मौत का खौफ़ भूल कर यारो क्यूँ

क्या ज़माना था कि हम रोज़ मिला करते थे

kya zamana tha ki ham roz mila karte the

क्या ज़माना था कि हम रोज़ मिला करते थे रात भर चाँद के हमराह फिरा करते थे, जहाँ

जब से तेरी हर बात में रहने लगे

jab se teri har baat me rahne lage

जब से तेरी हर बात में रहने लगे दुश्मन मेरे औक़ात में रहने लगे, ये बात भी उनको

कहानी दर्द ओ गम की ज़िन्दगी से…

kahani dard o gam ki zindagi se kya kahta

कहानी दर्द ओ गम की ज़िन्दगी से क्या कहता ? सबब ए रंज़ ओ गम जो है उसी

दिल की बस्ती पे किसी दर्द का साया…

dil ki basti pe kisi dard ka saya bhi nahi

दिल की बस्ती पे किसी दर्द का साया भी नहीं ऐसा वीरानी का मौसम कभी आया भी नहीं,

फ़िराक़ ओ वस्ल से हट कर कोई रिश्ता…

firaq o vasl se hat kar koi rishta hamara ho

फ़िराक़ ओ वस्ल से हट कर कोई रिश्ता हमारा हो बग़ैर उस के भी शायद ज़िंदगी हमको गवारा