ग़म के हर एक रंग से मुझको शनासा कर

gam ke har ek rang se mujhko

ग़म के हर एक रंग से मुझको शनासा कर गया वो मेरा मोहसिन मुझे पत्थर से हीरा कर

ग़म है वहीं प ग़म का सहारा गुज़र गया

gam hai wahi pa gam ka sahara guzar

ग़म है वहीं प ग़म का सहारा गुज़र गया दरिया ठहर गया है किनारा गुज़र गया, बस ये

दिल के बहलाने का सामान न समझा जाए

dil ke bahlane ka samaan na

दिल के बहलाने का सामान न समझा जाए मुझको अब इतना भी आसान न समझा जाए, मैं भी

मैं एक काँच का पैकर वो शख़्स पत्थर था

main ek kaanch ka paikar wo shakhs patthar tha

मैं एक काँच का पैकर वो शख़्स पत्थर था सो पाश पाश तो होना मेरा मुक़द्दर था, तमाम

ख़ुद आगही का अजब रोग लग गया है

khud aagahi ka azab rog

ख़ुद आगही का अजब रोग लग गया है मुझे कि अपनी ज़ात पे धोका तेरा हुआ है मुझे,

सबब ए चश्म ए तर कैसे बताऊँ तुझे ?

sabab e chashm e tar kaise

सबब ए चश्म ए तर कैसे बताऊँ तुझे ? ज़ख़्म ए दिल ओ जाँ कैसे दिखाऊं तुझे ?

दिल किस के तसव्वुर में जाने…

dil kis ke tasavvur me jaane

दिल किस के तसव्वुर में जाने रातों को परेशाँ होता है ये हुस्न ए तलब की बात नहीं

दिल हिज्र के दर्द से बोझल है अब…

dil hizr ke dard se bojhl hai

दिल हिज्र के दर्द से बोझल है अब आन मिलो तो बेहतर हो इस बात से हम को

दिल इश्क़ में बे पायाँ सौदा हो तो ऐसा हो

ishq dil me be payaan sauda ho to aisa ho

दिल इश्क़ में बे पायाँ सौदा हो तो ऐसा हो दरिया हो तो ऐसा हो सहरा हो तो

वो एक रात की गर्दिश में इतना हार गया

wo ek raat ki gardish me itna haar gaya

वो एक रात की गर्दिश में इतना हार गया लिबास पहने रहा और बदन उतार गया, हसब नसब