नहीं डरता मैं काँटो से मगर फूलो से डरता हूँ…

नहीं डरता मैं काँटो से मगर फूलो से डरता हूँ
चुभन दे जाएँ जो दिल को मैं उन बातो से डरता हूँ,

मुझे तो नींद भी अच्छी नहीं लगती हकीक़त में
दिखाएँ ख़्वाब जो झूठे मैं उन नींदों से डरता हूँ,

अना का मैं नहीं कायल मुहब्बत है मुझे सबसे
जो दिलो में बुग्ज़ रखते हो मैं उन अपनों से डरता हूँ,

मुझे एहसास है सबका मैं सबके काम आता हूँ
मगर जो कीना रखते हो मैं उन रिश्तो से डरता हूँ,

मैं बन्दा हूँ ख़ुदा का और ख़ुदा का खौफ़ है मुझको
जो डरते नहीं रब से मैं उन बन्दों से डरता हूँ..!!

Leave a Reply

error: Content is protected !!