मुहब्बत आज़माती है, मुझे तुम याद आते हो…

मुहब्बत आज़माती है, मुझे तुम याद आते हो
जुदाई अब सताती है, मुझे तुम याद आते हो,

मुहब्बत के सुनहरे बाग़ में है चैन से कोयल
कोई जब गीत गाती है, मुझे तुम याद आते हो,

अज़ीयत हो कि राहत हो, कोई कैसी भी मंज़िल हो
तुम्हारी याद आती है, मुझे तुम याद आते हो,

कोई तश्कीन शुदा चेहरा नहीं भाता,निगाह लेकिन
तुम्हे रो कर बुलाती है, मुझे तुम याद आते हो,

नहीं जब तुम यहाँ होते, उदासी ज़ुल्म ढहाती है
मुझे इतना रुलाती है, मुझे तुम याद आते हो,

मुझे लोरी सुनाती है मेरी तन्हाईयाँ शब भर
उदासी गुनगुनाती है, मुझे तुम याद आते हो,

किसी मासूम हसरत पर कोई रोती हुई लड़की
कभी जब मुस्कुराती है, मुझे तुम याद आते हो..!!

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