मेरा पड़ोसी कोई माल दार थोड़ी है

मेरा पड़ोसी कोई माल दार थोड़ी है
ये कार बैंक की है उसकी कार थोड़ी है,

हर एक मुल्क में जाएँगे खाएँगे जूते
कि बुज़दिलों में हमारा शुमार थोड़ी है,

ख़ुदा का शुक्र है चक्कर कई से हैं अपने
बस एक बीवी पे दार ओ मदार थोड़ी है,

गले में डाल के बाहें सड़क पे घूमेंगे
है नक़्द इश्क़ हमारा उधार थोड़ी है,

हमारा प्यार जो क़ाज़ी निकाह तक पहोंचे
हमारे बीच कोई इतना प्यार थोड़ी है,

जो फ़ोन बंद रखूँ कॉल न उठाऊँ मैं
किसी के बाप का मुझ पे उधार थोड़ी है..!!

~अहमद अल्वी

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