लिखतें हैं दिल का हाल सुबह ओ शाम मुसलसल

लिखतें हैं दिल का हाल सुबह ओ शाम मुसलसल
तुम आते हो बहुत याद, सुबह ओ शाम मुसलसल,

थक जाते हैं कर के कोशिशे सुलझते नहीं हैं गम
होते हैं कुछ यूँ नाकाम सुबह ओ शाम मुसलसल,

हम लाख जतन कर लें खुल ही जाते हैं बे धड़क
दिल के ये दर ओ बाम सुबह ओ शाम मुसलसल,

अब तो जंग सी छिड़ गई है दिल और दिमाग की
होते हैं कुछ यूँ बे आराम सुबह ओ शाम मुसलसल,

मुमकिन नहीं यारो कि अब होश में आएँ
पीते हैं भर भर के जाम सुबह ओ शाम मुसलसल..!!


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