कुछ न इस काम में किफ़ायत की

कुछ न इस काम में किफ़ायत की
मैं ने दिल खोल कर मोहब्बत की,

सस्ते दामों कहाँ मैं बिकता हूँ
बस तेरे वास्ते रिआयत की,

काम इस शहर में ये मुश्किल था
पर तेरे इश्क़ की हिफ़ाज़त की,

मुझ को अब कुछ गिला नहीं ख़ुद से
मैं ने जी भर के तेरी चाहत की,

मैं तो मजबूर हो गया उस पल
जब तेरे हिज्र ने बग़ावत की..!!

~यासीनआतिर

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