मैं रूठा था मुहब्बत से
कि मुहब्बत कुछ नहीं होती,
मुहब्बत तो फ़क़त दिखवा है
कि मुहब्बत झूठ है लोगो,
मुहब्बत सिर्फ़ एक कहानी है
जो किताबो में ही मिलती है,
मुहब्बत एक अफ़साना है
मगर जबसे ये जाना है कि…
हकीक़त और होती है
दिखावा और होता है, मुहब्बत और होती है,
कि एक अंजान को रस्ता
बताया जा भी सकता है,
मगर उसे मंज़िल तक
पहुँचाना ही मुहब्बत है,
कि एक ग़रीब के बच्चो को
दुआ दी भी जा सकती है,
मगर उन्हें कुछ अच्छा
खिलाना ही मुहब्बत है,
कि एक मज़दूर को उसकी
मज़दूरी दे देना भी काफ़ी है,
मगर उससे रवैया अपना
अच्छा रखना ही मुहब्बत है,
कि मुश्किल वक़्त में लोगो का
साथ देना भी काफ़ी है,
मगर उसी वक़्त उनको ख़ुशी की कुछ
वजहे देना ही मुहब्बत है,
किसी के सख्त लफ्ज़ो पर
ख़ामोश रहना ही काफ़ी है,
मगर अच्छे रवैये से उसको
समझा देना ही मुहब्बत है,
कि बूढ़े माँ बाप से अपने
अच्छे बोल बोलना भी काफ़ी है,
मगर उनकी बेतरतीब बातों को
तवज़्ज़ो से सुन लेना ही मुहब्बत है,
कि उलझे हुए एक दोस्त को अपने
हौसला देना भी काफ़ी है,
मगर उसकी इस उलझन को
सुलझा देना ही मुहब्बत है,
कि अपने दोस्तों के साथ
अच्छा वक़्त गुज़ारना भी काफी है,
मगर उनकी अल्लाह से दोस्ती
करवा देना ही मुहब्बत है,
हाँ ये ही मुहब्बत है !
मुहब्बत एक हकीक़त है
मुहब्बत एक हकीक़त है..!!
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