आरज़ू को दिल ही दिल में घुट के…

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आरज़ू को दिल ही दिल में घुट के रहना आ गया और वो ये समझे कि मुझ को

इस बहते हुए लहू में मुझे तो

is bahte hue lahoo me

इस बहते हुए लहू में मुझे तो बस इन्सान नज़र आ रहा है लानत हो तुम पे तुम्हे

दुनिया में यूँ भी हमने गुज़ारी है ज़िन्दगी

दुनिया में यूँ भी

दुनिया में यूँ भी हमने गुज़ारी है ज़िन्दगी अपनी कहाँ है जैसे उधारी है ज़िन्दगी, आवाज़ मुझको ना

संसार की हर शय का इतना ही फ़साना है

संसार की हर शय

संसार की हर शय का इतना ही फ़साना है एक धुंध से आना है एक धुंध में जाना

मर चुका हूँ कई बार फिर भी कई..

mar chuka hoo kai

मर चुका हूँ कई बार फिर भी कई बार मरना है मरने से पहले ज़िन्दगी को रग रग

रह के मक्कारों में मक्कार हुई है दुनिया

रह के मक्कारों में

रह के मक्कारों में मक्कार हुई है दुनिया मेरे दुश्मन की तरफ़दार हुई है दुनिया, पाक दामन थी

ऐसा अपनापन भी क्या जो अज़नबी

ऐसा अपनापन भी क्या

ऐसा अपनापन भी क्या जो अज़नबी महसूस हो साथ रह कर भी गर मुझे तेरी कमी महसूस हो,

गर्मी ए हसरत ए नाकाम से जल जाते हैं

garmi e hasrat e naqam

गर्मी ए हसरत ए नाकाम से जल जाते हैं हम चराग़ों की तरह शाम से जल जाते हैं,

बूढ़ा टपरा टूटा छपरा और उस पर बरसातें सच

बूढ़ा टपरा टूटा छपरा

बूढ़ा टपरा, टूटा छपरा और उस पर बरसातें सच उसने कैसे काटी होगी, लंबी लंबी राते सच ?

अज़ाब ए हिज़्र बढ़ा लूँ अगर इजाज़त हो

अज़ाब ए हिज़्र बढ़ा

अज़ाब ए हिज़्र बढ़ा लूँ अगर इजाज़त हो एक और ज़ख्म खा लूँ अगर इजाज़त हो, तुम्हारे आरिज़