काँटो का एक मकान मेरे पास रह गया

काँटो का एक मकान

काँटो का एक मकान मेरे पास रह गया एक फूल सा निशान मेरे पास रह गया, सामान तू

दश्त की धूप है जंगल की घनी रातें हैं

दश्त की धूप है

दश्त की धूप है जंगल की घनी रातें हैं इस कहानी में बहर हाल कई बातें हैं, गो

दूर होते हुए क़दमों की ख़बर जाती है

door hote hue qadmo ki

दूर होते हुए क़दमों की ख़बर जाती है ख़ुश्क पत्ते को लिए गर्द ए सफ़र जाती है, पास

उसे बेचैन कर जाऊँगा मैं भी…

use bechain kar jaaoounga

उसे बेचैन कर जाऊँगा मैं भी ख़मोशी से गुज़र जाऊँगा मैं भी, मुझे छूने की ख़्वाहिश कौन करता

महफ़िलें लुट गईं जज़्बात ने दम…

mahfile loot gai jazbat

महफ़िलें लुट गईं जज़्बात ने दम तोड़ दिया साज़ ख़ामोश हैं नग़्मात ने दम तोड़ दिया, हर मसर्रत

ख़्वाब का रिश्ता हक़ीक़त से न जोड़ा जाए

khwab ka rishta haqiqat

ख़्वाब का रिश्ता हक़ीक़त से न जोड़ा जाए आईना है इसे पत्थर से न तोड़ा जाए, अब भी

दुनियाँ में शातिर नहीं अब शरीफ़…

duniyan me shatir nahi

दुनियाँ में शातिर नहीं अब शरीफ़ लटकते है अब सच्चो की बात छोड़ो वो तो सर पटकते है,

यहाँ मरने की दुआएँ क्यूँ मांगूँ ?

yahan marne ki duaayen

यहाँ मरने की दुआएँ क्यूँ मांगूँ ? यहाँ जीने की तमन्ना कौन करे ? ये दुनियाँ हो या

काम उसके सारे ही सय्याद वाले है…

kaam uske saare hi

काम उसके सारे ही सय्याद वाले है मगर मैं उसे बहेलिया नहीं लिखता सर्दियाँ जितनी हो सब सह

अपने घर की चारदीवारी में अब…

apne ghar ki chaardeewari

अपने घर की चारदीवारी में अब लिहाफ़ में भी सिहरन होती है जिस दिन से किसी को गुर्बत