धरती पर जब ख़ूँ बहता है बादल…

dharti par jab khoon bahta hai badal rone lagta hai

धरती पर जब ख़ूँ बहता है बादल रोने लगता है देख के शहरों की वीरानी जंगल रोने लगता

उदासी का ये पत्थर आँसुओं से नम…

udasi ka ye patthar aansooon se nam nahi hota

उदासी का ये पत्थर आँसुओं से नम नहीं होता हज़ारों जुगनुओं से भी अँधेरा कम नहीं होता, कभी

हाल ए दिल सब से छुपाने में…

haal e dil sab se chhupane me maza aata hai

हाल ए दिल सब से छुपाने में मज़ा आता है आप पूछें तो बताने में मज़ा आता है,

जी भर कर रोने को करता है दिल…

jee bhar kar rone ko karta hai dil

जी भर कर रोने को करता है दिल आज पलकें भिगोने को करता है दिल, नहीं मालूम कुछ

वो इंसाँ जो शिकार ए गर्दिश ए अय्याम…

वो इंसाँ जो शिकार

वो इंसाँ जो शिकार ए गर्दिश ए अय्याम होता है भला करता है दुनिया का मगर बदनाम होता

यहाँ किसी को आवाज़ कहाँ उठाने…

यहाँ किसी को आवाज़

यहाँ किसी को आवाज़ कहाँ उठाने देता है कोई ज़रा सी आवाज़ करो तो गला दबा देता है

बुझ गई आँख तेरा इंतज़ार करते करते

bujh-gayi-aankh-tera-intazar

बुझ गई आँख तेरा इंतज़ार करते करते टूट गए हम एक तरफ़ा प्यार करते करते, क़यामत है इज़हार

तेरा ये लुत्फ़ किसी ज़ख़्म का उन्वान न हो

तेरा ये लुत्फ़ किसी

तेरा ये लुत्फ़ किसी ज़ख़्म का उन्वान न हो ये जो साहिल सा नज़र आता है तूफ़ान न

है अजीब शहर की ज़िंदगी न सफ़र…

है अजीब शहर की

है अजीब शहर की ज़िंदगी न सफ़र रहा न क़याम है कहीं कारोबार सी दोपहर कहीं बदमिज़ाज सी

क्या शर्त ए मुहब्बत है, क्या शर्त…

क्या शर्त ए मुहब्बत

क्या शर्त ए मुहब्बत है, क्या शर्त ए ज़माना है ! आवाज़ भी ज़ख़्मी है मगर गीत भी