अब इश्क़ तमाशा मुझे दिखलाए है कुछ और

ab ishq tamasha mujhe

अब इश्क़ तमाशा मुझे दिखलाए है कुछ और कहता हूँ कुछ और मुँह से निकल जाए है कुछ

बैठे तो पास हैं पर आँख उठा सकते नहीं

Baithe to paas hai

बैठे तो पास हैं पर आँख उठा सकते नहीं जी लगा है पर अभी हाथ लगा सकते नहीं,

बरहम कभी क़ासिद से वो महबूब न होता

barahm kabhi qasid se

बरहम कभी क़ासिद से वो महबूब न होता गर नाम हमारा सर ए मक्तूब न होता, ख़ूबान ए

मैं ने यूँ इन सर्द लबों को रखा…

Main ne yun in

मैं ने यूँ इन सर्द लबों को रखा उन रुख़्सारों पर जैसे कोई भूल से रख दे फूलों

ऐ जुनूँ तेरा अभी तक न मुक़द्दर बदला

Ae Junoon tera abhi

ऐ जुनूँ तेरा अभी तक न मुक़द्दर बदला शहर बदला न किसी हाथ का पत्थर बदला, ज़िंदगी बख़्श

राहें वीरान तो उजड़े हुए कुछ घर होंगे

Raahen veeran to ujde

राहें वीरान तो उजड़े हुए कुछ घर होंगे दश्त से बढ़ के मेंरे शहर के मंज़र होंगे, यूँ

लिबास तन से उतार देना, किसी को बांहों के हार देना

लिबास तन से उतार

लिबास तन से उतार देना, किसी को बांहों के हार देना फिर उसके जज़्बों को मार देना, अगर

असर उस को ज़रा नहीं होता

असर उस को ज़रा

असर उस को ज़रा नहीं होता रंज राहत फ़ज़ा नहीं होता, बेवफ़ा कहने की शिकायत है तो भी

रह वफ़ा में कोई साहिब ए जुनूँ न मिला

रह वफ़ा में

, गुलों के रुख़ पे वही ताज़गी का आलम है न जाने उन को ग़म ए रोज़गार क्यूँ

और कोई दम की मेहमाँ है गुज़र जाएगी रात

और कोई दम की

और कोई दम की मेहमाँ है गुज़र जाएगी रात ढलते ढलते आप अपनी मौत मर जाएगी रात, ज़िंदगी