जताए हक़ न कैसे हम भला इक़रार पे…

जताए हक़ न कैसे

जताए हक़ न कैसे हम भला इक़रार पे उनके हमें फिर भी नाज़ होता है हसीं इंकार पे

इतना एहसान तो हम पर वो ख़ुदारा करते

itna ehsan to ham par

इतना एहसान तो हम पर वो ख़ुदारा करते अपने हाथों से जिगर चाक हमारा करते, हमको तो दर्द

इस बहते हुए लहू में मुझे तो

is bahte hue lahoo me

इस बहते हुए लहू में मुझे तो बस इन्सान नज़र आ रहा है लानत हो तुम पे तुम्हे

दुनिया में यूँ भी हमने गुज़ारी है ज़िन्दगी

दुनिया में यूँ भी

दुनिया में यूँ भी हमने गुज़ारी है ज़िन्दगी अपनी कहाँ है जैसे उधारी है ज़िन्दगी, आवाज़ मुझको ना

संसार की हर शय का इतना ही फ़साना है

संसार की हर शय

संसार की हर शय का इतना ही फ़साना है एक धुंध से आना है एक धुंध में जाना

मर चुका हूँ कई बार फिर भी कई..

mar chuka hoo kai

मर चुका हूँ कई बार फिर भी कई बार मरना है मरने से पहले ज़िन्दगी को रग रग

घबराने से मसले हल नहीं होते

ghabrane se masle hal

घबराने से मसले हल नहीं होते जो आज है वो कल नहीं होते, याद रखना हमेशा इस बात

बात इधर उधर तो बहुत घुमाई जा..

बात इधर उधर तो

बात इधर उधर तो बहुत घुमाई जा सकती है पर सच्चाई भला कब तक छुपाई जा सकती है

अब मुहब्बत का इरादा बदल जाना भी…

अब मुहब्बत का इरादा

अब मुहब्बत का इरादा बदल जाना भी मुश्किल है उन्हें खोना भी मुश्किल,उन्हें पाना भी मुश्किल है, ज़रा

रह के मक्कारों में मक्कार हुई है दुनिया

रह के मक्कारों में

रह के मक्कारों में मक्कार हुई है दुनिया मेरे दुश्मन की तरफ़दार हुई है दुनिया, पाक दामन थी