कहानी दर्द ओ गम की ज़िन्दगी से…

kahani dard o gam ki zindagi se kya kahta

कहानी दर्द ओ गम की ज़िन्दगी से क्या कहता ? सबब ए रंज़ ओ गम जो है उसी

किया इश्क था जो बाइसे रुसवाई बन गया

kiya ishq tha jo baaise ruswai ban gaya

किया इश्क था जो बाइसे रुसवाई बन गया यारो तमाम शहर तमाशाई बन गया, बिन माँगे मिल गए

तजुर्बे के दम पर दीवानों ने कहा था…

tazrube ke dam par deewano ne kaha tha

तजुर्बे के दम पर दीवानों ने कहा था इश्क़ बुरा है मगर जुनूँ ए इश्क़ में ये बात

बस एक बार किसी ने गले लगाया था

bas ek baar kisi ne gale lagaya tha

बस एक बार किसी ने गले लगाया था फिर उस के बाद न मैं था न मेरा साया

किस सिम्त चल पड़ी है खुदाई ऐ मेरे ख़ुदा

kis simt chal padi hai khudaai ae mere khuda

किस सिम्त चल पड़ी है खुदाई ऐ मेरे ख़ुदा नफ़रत ही दे रही है दिखाई ऐ मेरे ख़ुदा,

हक़ीर जानता है इफ्तिखार माँगता है

haqir jaanta hai iftikhar maangta hai

हक़ीर जानता है इफ्तिखार माँगता है वो ज़हर बाँटता है और प्यार माँगता है, ज़लील कर के रख

ये बेड़ियाँ मेरे पाँव में तुम पहना तो रहे हो

ye bediyan mere paanv me tum pahna to rahe ho

ये बेड़ियाँ मेरे पाँव में तुम पहना तो रहे हो फिर अहद भी ख़ुद ही तोड़ के जा

हालात ए ज़िन्दगी से हुए मज़बूर…

haalaat e zindagi se hue mazboor kya kare

हालात ए ज़िन्दगी से हुए मज़बूर क्या करे ? ज़ख्म ए ज़िगर भी हो गए नासूर क्या करे

आँखें यूँ बरसीं पैराहन भीग गया…

aankhe yun barasi pairahan bhig gaya

आँखें यूँ बरसीं पैरहन भीग गया तेरे ध्यान में सारा सावन भीग गया, ख़ुश्क महाज़ो बढ़ के मुझे

ये तसव्वुर का वार झूठा है…

ye tasavvur ka vaar jhutha hai

ये तसव्वुर का वार झूठा है ख़्वाब झूटे हैं सार झूठा है, फूल तुम तोड़ लाए शाख़ों से