वही हुस्न ए यार में है वही लाला ज़ार में है

wahi husn e yaar me hai wahi lalazar

वही हुस्न ए यार में है वही लाला ज़ार में है वो जो कैफ़ियत नशे की मय ए

वही है वहशत वही है नफ़रत आख़िर…

wahi hai wahshat wahi hai nafrat aakhir

वही है वहशत वही है नफ़रत आख़िर इस का क्या है सबब ? इंसाँ इंसाँ बहुत रटा है

वही दर्द है वही बेबसी तेरे गाँव में मेरे…

wahi dard wahi bebasi tere gaanv mere shahar me

वही दर्द है वही बेबसी तेरे गाँव में मेरे शहर में बे गमो की भीड़ में आदमी तेरे

थे ख़्वाब एक हमारे भी और तुम्हारे भी

the khwab ek hamare bhi aur tumhare bhi

थे ख़्वाब एक हमारे भी और तुम्हारे भी पर अपना खेल दिखाते रहे सितारे भी, ये ज़िन्दगी है

ख़ुशी जानते हैं न ग़म जानते हैं…

khushi jaante hai na gam jaante hai jo unki

ख़ुशी जानते हैं न ग़म जानते हैं जो उनकी रज़ा हो वो हम जानते हैं, जो कुछ चार

ये मरहले भी मोहब्बत के बाब में आए

ye marhale bhi mohabbat ki raah me aaye

ये मरहले भी मोहब्बत के बाब में आए बिछड़ गए थे जो हमसे वो ख़्वाब में आए, वो

तेरे पैकर सी कोई मूरत बना ली जाएगी

tere paikar si koi murat bana li jayegi

तेरे पैकर सी कोई मूरत बना ली जाएगी दिल के बहलाने की ये सूरत निकाली जाएगी, कौन कह

ग़म के हर एक रंग से मुझको शनासा कर

gam ke har ek rang se mujhko

ग़म के हर एक रंग से मुझको शनासा कर गया वो मेरा मोहसिन मुझे पत्थर से हीरा कर

ग़म है वहीं प ग़म का सहारा गुज़र गया

gam hai wahi pa gam ka sahara guzar

ग़म है वहीं प ग़म का सहारा गुज़र गया दरिया ठहर गया है किनारा गुज़र गया, बस ये

दिल के बहलाने का सामान न समझा जाए

dil ke bahlane ka samaan na

दिल के बहलाने का सामान न समझा जाए मुझको अब इतना भी आसान न समझा जाए, मैं भी