हज़ारों ख़्वाहिशें ऐसी कि हर ख़्वाहिश पे दम निकले…

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हज़ारों ख़्वाहिशें ऐसी कि हर ख़्वाहिश पे दम निकले बहुत निकले मेरे अरमान लेकिन फिर भी कम निकले,

शाम तक सुबह की नज़रों से उतर जाते है…

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शाम तक सुबह की नज़रों से उतर जाते है इतने समझौतों पे जीते है कि मर जाते है,

ख़्वाब के जज़ीरो पर एक दीया जलाना था…

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ख़्वाब के जज़ीरो पर एक दीया जलाना था और फिर हवाओं को रास्ता बताना था, दर्द की फ़सिलो

उदास शामो का तुम कुछ हिसाब रख लेना…

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उदास शामो का तुम कुछ हिसाब रख लेना, दिल ए हज़ीं में मुहब्बत का बाब रख लेना, न

बारिश की बरसती बूँदों ने जब दस्तक दी दरवाज़े पर…

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बारिश की बरसती बूँदों ने जब दस्तक दी दरवाज़े पर महसूस हुआ तुम आये हो, अंदाज़ तुम्हारे जैसा

अभी तो चाँद निकला है, अभी तो रात बाक़ी है…

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अभी तो चाँद निकला है, अभी तो रात बाक़ी है दिल को दिल से कहनी है, अभी वो

वो लोग जो कुछ रोज़ जवानी में मिलेंगे…

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वो लोग जो कुछ रोज़ जवानी में मिलेंगे हर शाम वो फिर तेरी कहानी में मिलेंगे, ढूँढो न

एक वो इतने खूबरू तौबा…

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एक वो इतने खूबरू तौबा उसपे छूने की आरज़ू तौबा ! हाथ काँपेंगे रूह मचलेगी जब वो आएँगे

यूँ ही तन्हाई में अब दिल को सजा देते है…

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यूँ ही तन्हाई में अब दिल को सजा देते है नाम लिखते है तेरा लिख के मिटा देते

क्या मिला ? और हुआ कितना ख़सारा सोचा…

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क्या मिला ? और हुआ कितना ख़सारा सोचा बाद मुद्दत के यही क़िस्सा दोबारा सोचा, रात फिर देर