तुम कुछ भी करो होश में आने के नहीं हम…

tum kuch bhi karo hosh me aane ke nahi ham

तुम कुछ भी करो होश में आने के नहीं हम हैं इश्क़ घराने के ज़माने के नहीं हम,

तुम्हें उससे मोहब्बत है तो हिम्मत क्यूँ नहीं करते…

tumhe usse mohabbat hai to himmat kyun nahi

तुम्हें उससे मोहब्बत है तो हिम्मत क्यूँ नहीं करते किसी दिन उसके दर पे रक़्स ए वहशत क्यूँ

राह ए इश्क़ के हर मोड़ पे परेशानियाँ होंगी…

wo is andaz ki mujhse mohabbat chahta hai

राह ए इश्क़ के हर मोड़ पे परेशानियाँ होंगी बहारे ना सही मगर सदा ही वीरानियाँ होंगी, कहीं

पास आओ एक इल्तज़ा सुन लो…

nazar se guftagoo khamosh lab tumhari tarah

पास आओ एक इल्तज़ा सुन लो प्यार है तुमसे बेपनाह सुन लो, एक तुम्ही को ख़ुदा से माँगा

मुहब्बत जो हकीकी हो तो क़िस्मत ही सँवर जाती…

ye ishq me sab duniya wale

मुहब्बत जो हकीकी हो तो क़िस्मत ही सँवर जाती मुहब्बत जो मिजाज़ी हो तो उलझन औद कर आती,

मेरा दिल बुराई से तू साफ़ कर दे…

kis simt chal padi hai khudai mere khuda

मेरा दिल बुराई से तू साफ़ कर दे ऐ देने वाले मुझे माफ़ कर दे,   मेरी तरफ

राहें वही खड़ी थी मुसाफ़िर भटक गया…

raahe wahi khadi thi musafir bhatak gaya

राहें वही खड़ी थी मुसाफ़िर भटक गया एक लफ्ज़ आते आते लबो तक अटक गया, जिस पेड़ की

ये सच है कि हम लोग बहुत आसानी में रहें…

ye sach hai ki ham log bahut asaani me rahe

ये सच है कि हम लोग बहुत आसानी में रहें पर नाम वही कर गए जो बख्त गिरानी

कभी दादी कभी नानी से अलग कर दिए गए…

kabhi dadi kabhi naani se alag kar diye gaye

कभी दादी कभी नानी से अलग कर दिए गए बच्चे परियों की कहानी से अलग कर दिए गए,

कुछ ख़ुद भी थे अफ़सुर्दा से…

kuch ham bhi the afsurda se kuch log bhi hamse ruth gaye

कुछ ख़ुद भी थे अफ़सुर्दा से कुछ लोग भी हमसे रूठ गए, कुछ ख़ुद भी ज़ख्म के आदी