दिल की बस्ती पे किसी दर्द का साया…

dil ki basti pe kisi dard ka saya bhi nahi

दिल की बस्ती पे किसी दर्द का साया भी नहीं ऐसा वीरानी का मौसम कभी आया भी नहीं,

फ़िराक़ ओ वस्ल से हट कर कोई रिश्ता…

firaq o vasl se hat kar koi rishta hamara ho

फ़िराक़ ओ वस्ल से हट कर कोई रिश्ता हमारा हो बग़ैर उस के भी शायद ज़िंदगी हमको गवारा

तजुर्बे के दम पर दीवानों ने कहा था…

tazrube ke dam par deewano ne kaha tha

तजुर्बे के दम पर दीवानों ने कहा था इश्क़ बुरा है मगर जुनूँ ए इश्क़ में ये बात

बस एक बार किसी ने गले लगाया था

bas ek baar kisi ne gale lagaya tha

बस एक बार किसी ने गले लगाया था फिर उस के बाद न मैं था न मेरा साया

किस सिम्त चल पड़ी है खुदाई ऐ मेरे ख़ुदा

kis simt chal padi hai khudaai ae mere khuda

किस सिम्त चल पड़ी है खुदाई ऐ मेरे ख़ुदा नफ़रत ही दे रही है दिखाई ऐ मेरे ख़ुदा,

कर्ब ए फ़ुर्क़त रूह से जाता नहीं…

karb e furqat rooh se jaata nahi

कर्ब ए फ़ुर्क़त रूह से जाता नहीं हल कोई ग़म का नज़र आता नहीं, काश होता इल्म ये

एहसास ए इश्क़ दिल की पनाहों में…

ehsas e ishq dil ki panaaho me aa gaya

एहसास ए इश्क़ दिल की पनाहों में आ गया बादल सिमट के चाँद की बाहोँ में आ गया,

हक़ीर जानता है इफ्तिखार माँगता है

haqir jaanta hai iftikhar maangta hai

हक़ीर जानता है इफ्तिखार माँगता है वो ज़हर बाँटता है और प्यार माँगता है, ज़लील कर के रख

कर्ब ए फ़ुर्क़त रूह से जाता नहीं…

karb e furqat ruh se jata nahi

कर्ब ए फ़ुर्क़त रूह से जाता नहीं हल कोई ग़म का नज़र आता नहीं, काश होता इल्म ये

ये बेड़ियाँ मेरे पाँव में तुम पहना तो रहे हो

ye bediyan mere paanv me tum pahna to rahe ho

ये बेड़ियाँ मेरे पाँव में तुम पहना तो रहे हो फिर अहद भी ख़ुद ही तोड़ के जा