किए वादों का निभाना बाक़ी है

किए वादों का निभाना

किए वादों का निभाना बाक़ी है और अभी उनको मनाना बाक़ी है, मुझे अपना भी समझना बाक़ी है

बात करते है ख़ुशी की भी तो रंज़ के साथ

baat karte hai khushi ki

बात करते है ख़ुशी की भी तो रंज़ के साथ वो हँसाते भी है ऐसा कि रुला देते

कभी कहा न किसी से तेरे फ़साने को

कभी कहा न किसी

कभी कहा न किसी से तेरे फ़साने को न जाने कैसे ख़बर हो गई ज़माने को, दुआ बहार

साथ चलते आ रहे हैं पास आ सकते नहीं

साथ चलते आ रहे

साथ चलते आ रहे हैं पास आ सकते नहीं एक नदी के दो किनारों को मिला सकते नहीं,

हुस्न ए मह गरचे बहंगाम ए कमाल अच्छा है

husn e mah garche

हुस्न ए मह गरचे बहंगाम ए कमाल अच्छा है उससे मेरा मह ए ख़ुर्शीद जमाल अच्छा है, बोसा

जुज़ तेरे कोई भी दिन रात न जाने मेरे

जुज़ तेरे कोई भी

जुज़ तेरे कोई भी दिन रात न जाने मेरे तू कहाँ है मगर ऐ दोस्त पुराने मेरे ?

यकुम जनवरी है नया साल है

यकुम जनवरी है नया

यकुम जनवरी है नया साल है दिसम्बर में पूछूँगा क्या हाल है, बचाए ख़ुदा शर की ज़द से

ज़िन्दगी की कशमकश से परेशान बहुत है

zindagi ki kashmakash se pareshan bahut hai

ज़िन्दगी की कशमकश से परेशान बहुत है दिल को न उलझाओ ये नादान बहुत है, यूँ सामने आ

गिले फ़ुज़ूल थे अहद ए वफ़ा के होते हुए

गिले फ़ुज़ूल थे अहद

गिले फ़ुज़ूल थे अहद ए वफ़ा के होते हुए सो चुप रहा सितम ए नारवां के होते हुए,

किसी दरबार की आमीन भरी खल्वत में

किसी दरबार की आमीन

किसी दरबार की आमीन भरी खल्वत में ऐन मुमकिन है तुम्हे मेरा पता मिल जाए, ये भी हो