नदी के पार उजाला दिखाई देता है

नदी के पार उजाला

नदी के पार उजाला दिखाई देता है मुझे ये ख़्वाब हमेशा दिखाई देता है, बरस रही हैं अक़ीदत

ज़बाँ है मगर बे ज़बानों में है….

ज़बाँ है मगर बे

ज़बाँ है मगर बे ज़बानों में है नसीहत कोई उसके कानों में है, चलो साहिलों की तरफ़ रुख़

वो सर फिरी हवा थी सँभलना पड़ा मुझे

Bazmeshayari_512X512

वो सर फिरी हवा थी सँभलना पड़ा मुझे मैं आख़िरी चराग़ था जलना पड़ा मुझे, महसूस कर रहा

सुना है ये जहाँ अच्छा था पहले…

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सुना है ये जहाँ अच्छा था पहले ये जो अब दश्त है दरिया था पहले, जो होता कौन

न जिस्म साथ हमारे न जाँ हमारी तरफ़

न जिस्म साथ हमारे

न जिस्म साथ हमारे न जाँ हमारी तरफ़ है कुछ भी हम में हमारा कहाँ हमारी तरफ़, खड़े

चलो वो इश्क़ नहीं चाहने की आदत है

chalo wo ishq nahi

चलो वो इश्क़ नहीं चाहने की आदत है पर क्या करें हमें एक दूसरे की आदत है, तू

मेरे दिल में जब कोई मलाल होता है…

मेरे दिल में जब कोई

मेरे दिल में जब कोई मलाल होता है तुम क्या जानो मेरा कैसा हाल होता है, मेरी हर

ये कब चाहा कि मैं मशहूर हो जाऊँ…

ye kab chaha ki main

ये कब चाहा कि मैं मशहूर हो जाऊँ बस अपने आप को मंज़ूर हो जाऊँ, नसीहत कर रही

शख्सियत ए लख्त ए ज़िगर कहला…

शख्सियत ए लख्त ए

शख्सियत ए लख्त ए ज़िगर कहला न सका ज़न्नत के धनी क़दमों को मैं सहला न सका, दूध

ग़मों का सैलाब आया ज़रूर है…

gamo ka sailab aya zarur hai

ग़मों का सैलाब आया ज़रूर है कुछ खोया तो कुछ पाया ज़रूर है, एक तुम हो जो दर्द