अज़ब मअमूल है आवारगी का…

dosto se rasaai sochenge

अज़ब मअमूल है आवारगी का गिरेबाँ झाँकती है हर गली का, न जाने किस तरह कैसे ख़ुदा ने

हादसे ज़ीस्त की तौक़ीर बढ़ा देते हैं…

teri khushiyo ka sabab yaar koi aur hai na

हादसे ज़ीस्त की तौक़ीर बढ़ा देते हैं ऐ ग़म ए यार तुझे हम तो दुआ देते हैं, तेरे

हैरतों के सिलसिले सोज़ ए निहाँ तक आ गए..

हैरतों के सिलसिले सोज़

हैरतों के सिलसिले सोज़ ए निहाँ तक आ गए हम नज़र तक चाहते थे तुम तो जाँ तक

मैंने कहा कि दिल में तो अरमान हैं बहुत…

zahar ke ghoont bhi hans hans ke piye jate hai

मैंने कहा कि दिल में तो अरमान हैं बहुत उस ने कहा कि आप तो नादान हैं बहुत,

मैं तकिए पर सितारे बो रहा हूँ…

मैं तकिए पर सितारे

मैं तकिए पर सितारे बो रहा हूँ जन्म दिन है अकेला रो रहा हूँ, किसी ने झाँक कर

मुहताज हमसफ़र की मसाफ़त न थी मेरी…

muhtaz hamsafar ki masafat

मुहताज हमसफ़र की मसाफ़त न थी मेरी सब साथ थे किसी से रिफ़ाक़त न थी मेरी, हक़ किस

राहें वही खड़ी थी मुसाफ़िर भटक गया…

raahe wahi khadi thi musafir bhatak gaya

राहें वही खड़ी थी मुसाफ़िर भटक गया एक लफ्ज़ आते आते लबो तक अटक गया, जिस पेड़ की

ये सच है कि हम लोग बहुत आसानी में रहें…

ye sach hai ki ham log bahut asaani me rahe

ये सच है कि हम लोग बहुत आसानी में रहें पर नाम वही कर गए जो बख्त गिरानी

कभी दादी कभी नानी से अलग कर दिए गए…

kabhi dadi kabhi naani se alag kar diye gaye

कभी दादी कभी नानी से अलग कर दिए गए बच्चे परियों की कहानी से अलग कर दिए गए,

कुछ ख़ुद भी थे अफ़सुर्दा से…

kuch ham bhi the afsurda se kuch log bhi hamse ruth gaye

कुछ ख़ुद भी थे अफ़सुर्दा से कुछ लोग भी हमसे रूठ गए, कुछ ख़ुद भी ज़ख्म के आदी