हर दिन है मुहब्बत का, हर रात मुहब्बत की

har din hai muhabbat ka har raat muhabbat ke

हर दिन है मुहब्बत का, हर रात मुहब्बत की हम अहल ए मुहब्बत में, हर बात मुहब्बत की,

दिलजलों से दिल्लगी अच्छी नहीं

diljalon se dillagi achchi nahin

दिलजलों से दिल्लगी अच्छी नहीं रोने वालों से हँसी अच्छी नहीं, मुँह बनाता है बुरा क्यूँ वक़्त ए

मेरी तन्हाई बढ़ाते हैं चले जाते है

meri tanhaai badhaate hai chale jaate hai

मेरी तन्हाई बढ़ाते हैं चले जाते है हँस तालाब पे आते हैं चले जाते हैं, इसलिए अब मैं

खींच कर रात की दीवार पे मारे होते

khich kar raat ki deewar pe

खींच कर रात की दीवार पे मारे होते मेरे हाथों में अगर चाँद सितारे होते, यार ! क्या

हो चराग़ ए इल्म रौशन ठीक से

ho charag e ilm raushan thik se

हो चराग़ ए इल्म रौशन ठीक से लोग वाक़िफ़ हों नई तकनीक से, इल्म से रौशन तो है

मोड़ था कैसा तुझे था खोने वाला मैं

mod tha kaisa

मोड़ था कैसा तुझे था खोने वाला मैं रो ही पड़ा हूँ कभी न रोने वाला मैं, क्या

फूल का शाख़ पे आना भी बुरा लगता है

phool ka shaakh pe aana bhi bura lagta hai

फूल का शाख़ पे आना भी बुरा लगता है तू नहीं है तो ज़माना भी बुरा लगता है,

मुझपे हैं सैकड़ों इल्ज़ाम मेंरे साथ न चल

mujhpe hai saikdo ilzam mere saath na chal

मुझपे हैं सैकड़ों इल्ज़ाम मेंरे साथ न चल तू भी हो जाएगा बदनाम मेंरे साथ न चल, तू

परों को खोल ज़माना उड़ान देखता है

paron ko khol zamaana udaan dekhta hai

परों को खोल ज़माना उड़ान देखता है ज़मीं पे बैठ के क्या आसमान देखता है, मिला है हुस्न

ये जो नंग थे ये जो नाम थे मुझे खा गए

ye jo nang the ye jo naam the

ये जो नंग थे ये जो नाम थे मुझे खा गए ये ख़याल ए पुख़्ता जो ख़ाम थे