और क्या करता बयान ए गम तुम्हारे सामने

और क्या करता बयान

और क्या करता बयान ए गम तुम्हारे सामने मेरी आँखें हो गई पुरनम तुम्हारे सामने, हम जुदाई में

तलाश ए जन्नत ओ दोज़ख में रायेगाँ इंसाँ

तलाश ए जन्नत ओ

तलाश ए जन्नत ओ दोज़ख में रायेगाँ इंसाँ तलाश ए जन्नत ओ दोज़ख में रायेगाँ इंसाँ ज़मीं पे

जब से उनका ख्याल रखा है

जब से उनका ख्याल

जब से उनका ख्याल रखा है दिल ने मुश्किल में डाल रखा है, उन पर दिल ये आ

अपने साये से भी अक्सर डर जाते है लोग

अपने साये से भी

अपने साये से भी अक्सर डर जाते है लोग जाने अनजाने में गुनाह कर जाते है लोग, लिखी

ज़िन्दगी ने लिया है ऐसा इम्तिहाँ मेरा

ज़िन्दगी ने लिया है

ज़िन्दगी ने लिया है ऐसा इम्तिहाँ मेरा सदा ही साथ रहा है गम ए दौराँ मेरा, दिन ओ

हर एक घर में दिया भी जले अनाज भी हो

har ek ghar me diya bhi jale

हर एक घर में दिया भी जले अनाज भी हो अगर न हो कहीं ऐसा तो एहतिजाज भी

नई नई आँखें हों तो हर मंज़र अच्छा लगता है

nayi nayi aankhen ho to har manzar

नई नई आँखें हों तो हर मंज़र अच्छा लगता है कुछ दिन शहर में घूमे लेकिन अब घर

हर तरफ़ हर जगह बेशुमार आदमी

har taraf har jagah beshum

हर तरफ़ हर जगह बेशुमार आदमी फिर भी तन्हाइयों का शिकार आदमी, सुब्ह से शाम तक बोझ ढोता

जो हो एक बार वो हर बार हो ऐसा नहीं होता

jo ho ek bar wo ho har baar aisa nahi hota

जो हो एक बार वो हर बार हो ऐसा नहीं होता हमेशा एक ही से प्यार हो ऐसा

सीधे साधे लोग थे पहले घर भी सादा होता था

sidhe saadhe log the pahle

सीधे साधे लोग थे पहले घर भी सादा होता था कमरे कम होते थे और दालान कुशादा होता