अब शौक़ से कि जाँ से गुज़र जाना चाहिए…

ab shauq se ki jaan se guzar jana chahiye

अब शौक़ से कि जाँ से गुज़र जाना चाहिए बोल ऐ हवा ए शहर किधर जाना चाहिए ?

लोग सह लेते थे हँस कर कभी बेज़ारी भी…

लोग सह लेते थे

लोग सह लेते थे हँस कर कभी बेज़ारी भी अब तो मश्कूक हुई अपनी मिलन सारी भी, वार

कुछ क़दम और मुझे जिस्म को ढोना है यहाँ…

kuch qadam aur mujhe zism

कुछ क़दम और मुझे जिस्म को ढोना है यहाँ साथ लाया हूँ उसी को जिसे खोना है यहाँ,

कुछ रोज़ से रोज़ शाम बस यूँ ही ढल जाती है

कुछ रोज़ से रोज़

कुछ रोज़ से रोज़ शाम बस यूँ ही ढल जाती है बीती हुई यादो की शमाँ मेरे सिरहाने

आंधियाँ भी चले और दीया भी जले…

charag apni thakan ki koi safai n de

आंधियाँ भी चले और दीया भी जले होगा कैसे भला आसमां के तले ? अब भरोसा करे भी

ज़मी सूखी है और पानी के भी लाले है…

zamin sukhi hai pani ke bhi lale hai

ज़मी सूखी है और पानी के भी लाले है इन्सान ही आज इन्सान के निवाले है जिनके दिलो

अज़ब मअमूल है आवारगी का…

dosto se rasaai sochenge

अज़ब मअमूल है आवारगी का गिरेबाँ झाँकती है हर गली का, न जाने किस तरह कैसे ख़ुदा ने

हादसे ज़ीस्त की तौक़ीर बढ़ा देते हैं…

teri khushiyo ka sabab yaar koi aur hai na

हादसे ज़ीस्त की तौक़ीर बढ़ा देते हैं ऐ ग़म ए यार तुझे हम तो दुआ देते हैं, तेरे

हैरतों के सिलसिले सोज़ ए निहाँ तक आ गए..

हैरतों के सिलसिले सोज़

हैरतों के सिलसिले सोज़ ए निहाँ तक आ गए हम नज़र तक चाहते थे तुम तो जाँ तक

मैंने कहा कि दिल में तो अरमान हैं बहुत…

zahar ke ghoont bhi hans hans ke piye jate hai

मैंने कहा कि दिल में तो अरमान हैं बहुत उस ने कहा कि आप तो नादान हैं बहुत,