लगा जब अक्स ए अबरू देखने दिलदार…

laga jab aks e abroo dekhne dildar paani men

लगा जब अक्स ए अबरू देखने दिलदार पानी में बहम हर मौज से चलने लगी तलवार पानी में,

किस के नाम लिखूँ जो अलम गुज़र रहे हैं

kis ke naam likhoon jo alam guzar rahe hai

किस के नाम लिखूँ जो अलम गुज़र रहे हैं मेरे शहर जल रहे हैं मेरे लोग मर रहे

मैं कैसे जियूँ गर ये दुनिया हर आन…

main kaise jiyoon gar ye duniya

मैं कैसे जियूँ गर ये दुनिया हर आन नई तस्वीर न हो ये आते जाते रंग न हों

परिंदों के चोंच भर लेने से…

parindo ke chonch bhar lene se

परिंदों के चोंच भर लेने से कभी सागर सूखा नहीं करते, हवाओं के रुख सूखे पत्तो से अपना

क़िस्मत का लिखा मिटा नहीं सकते…

qismat ka likha mita nahi sakti

क़िस्मत का लिखा मिटा नहीं सकते अनहोनी को होनी बना नहीं सकते, ज़माने में हस्ब ए आरज़ू किसी

वही आँगन वही खिड़की वही दर…

wahi aangan wahi khidki wahi dar yaad aata hai

वही आँगन वही खिड़की वही दर याद आता है अकेला जब भी होता हूँ मुझे घर याद आता

न ज़रूरत है दवा की न दुआ की दोस्तों !

naa zarurat dawa ki naa dua ki dosto

न ज़रूरत है दवा की न दुआ की दोस्तों ! दिल की गहराई से ज्यादा दर्द के फोड़े

दौर ए ज़दीद में गुनाह ओ सवाब बिकते है

daur e zadid me gunah o savab bikte hai

दौर ए ज़दीद में गुनाह ओ सवाब बिकते है वतन में अब जुबां, क़लम ज़नाब बिकते है, पहले

ये और बात दूर रहे मंज़िलों से हम

ye aur baat rahe manzilo se door ham

ये और बात दूर रहे मंज़िलों से हम बच कर चले हमेशा मगर क़ाफ़िलों से हम, होने को

हर एक हज़ार में बस पाँच सात हैं…

har ek hazaar me bas panch saath log hai hum log

हर एक हज़ार में बस पाँच सात हैं हम लोग निसाब ए इश्क़ पे वाजिब ज़कात हैं हम