आग बहते हुए पानी में लगाने आई

आग बहते हुए पानी

आग बहते हुए पानी में लगाने आई तेरे ख़त आज मैं दरिया में बहाने आई, फिर तेरी याद

होना नहीं अब उसने मेहरबान छोड़ दे

hona nahi ab usne mehrban

होना नहीं अब उसने मेहरबान छोड़ दे उसके लिए तू चाहे ये जहान छोड़ दे, कितनी उठाए हमने

पढ़ती रहती हूँ मैं सारी चिट्ठियाँ…

padhti rahti hoon main

पढ़ती रहती हूँ मैं सारी चिट्ठियांरात है और है तुम्हारी चिट्ठियां, आओ तो पढ़ कर सुनाऊँगी तुम्हेंलिख रखी

वो जो दिल के क़रीब होते है…

pyas jo umr bhar naa bujhi purani hogi

वो जो दिल के क़रीब होते है लोग वो भी अज़ीब होते है, पढ़ना लिखना जो जानते न

हम वक़्त ए मौत को तो हरगिज़ टाल न पाएँगे

waqt e maut ko hargiz taal naa payenge

हम वक़्त ए मौत को तो हरगिज़ टाल न पाएँगे हम ख़ाली हाथ आए है और ख़ाली हाथ

हमने कैसे यहाँ गुज़ारी है….

hamne kaise yahan guzari hai

हमने कैसे यहाँ गुज़ारी है अश्क खुनी है आह ज़ारी है, हम ही पागल थे जान दे बैठे

याद आता है मुझे छोड़ के जाने वाला

yaad aata hai mujhe chhod ke jaane wala

याद आता है मुझे छोड़ के जाने वाला मेरी हर शाम को रंगीन बनाने वाला, आज रो कर

मैंने माना कि तुम ज़ालिम नहीं हो मगर

मैंने माना कि तुम

मैंने माना कि तुम ज़ालिम नहीं हो मगर क्या मालूम था कि हम तुमसे डर जाएँगे, तेरी याद

बात करते है यहाँ क़तरे भी समन्दर की तरह

baat karte hai yahan qatre bhi samndar ki tarah

बात करते है यहाँ क़तरे भी समन्दर की तरह अब लोग ईमान बदलते है कैलेंडर की तरह, कोई

क्यूँ रवा रखते हो मुझसे सर्द मेहरी बे सबब

Bazmeshayari_512X512

क्यूँ रवा रखते हो मुझसे सर्द मेहरी बे सबब बीच में लाना पड़े थाना कचहरी बे सबब, मैंने