बेचैन बहुत फिरना घबराए हुए रहना
एक आग सी जज़्बों की दहकाए हुए रहना,
छलकाए हुए चलना ख़ुशबू लब ए लालीं की
एक बाग़ सा साथ अपने महकाए हुए रहना,
उस हुस्न का शेवा है जब इश्क़ नज़र आए
पर्दे में चले जाना शरमाए हुए रहना,
एक शाम सी कर रखना काजल के करिश्मे से
एक चाँद सा आँखों में चमकाए हुए रहना,
आदत ही बना ली है तुम ने तो मुनीर अपनी
जिस शहर में भी रहना उकताए हुए रहना..!!
~मुनीर नियाज़ी
➤ आप इन्हें भी पढ़ सकते हैं










Discover more from Bazm e Shayari :: बज़्म ए शायरी -Hindi / Urdu Poetry, Ghazals, Shayari
Subscribe to get the latest posts sent to your email.


















