बाँध ले हाथ पे सीने पे सजा ले तुमको…

बाँध ले हाथ पे सीने पे सजा ले तुमको
जी में आता है कि ताबीज़ बना ले तुमको,

फिर तुम्हे रोज़ संवारे तुम्हे बढ़ता देखे
क्यूँ न आँगन में चमेली सा लगा ले तुमको,

जैसे बालो में कोई फूल चुना करता है
घर के गुलदान में फूलो सा सजा ले तुमको,

क्या अज़ब ख्वाहिश उठती है हमारे दिल में
कर के मुन्ना सा हवाओं में उछाले तुमको,

इस क़दर टूट के तुम पे हमें प्यार आता है
अपनी बाहों में भरे मार ही डाले तुमको,

कभी ख़्वाबो की तरह आँख के परदे में रहो
कभी ख्वाहिश की तरह दिल में बुला ले तुमको,

है तुम्हारे लिए कुछ ऐसी अक़ीदत दिल में
अपने हाथो में दुआओं सा उठा ले तुमको,

जान देने की इज़ाजत भी नहीं देते हो
वरना मर जाएँ अभी मर के मना ले तुमको,

जिस तरह रात के सीने में है माहताब का नूर
अपने तारिक मकानों में सजा ले तुमको,

अब तो बस एक ही ख्वाहिश है किसी मोड़ पर तुम
हमको बिखरे हुए मिल जाओ संभाले तुमको.!!

~वसी शाह


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