सज़दे के सिवा सर को झुकाना नहीं आता…

hamne suna tha farishte jaan lete hai

रूठे हुए लोगो को मनाना नहीं आता सज़दे के सिवा सर को झुकाना नहीं आता, पत्थर तो चलाना

सावन को ज़रा खुल के बरसने की दुआ दो…

savan ko zara khul ke barasne ki dua do

सावन को ज़रा खुल के बरसने की दुआ दो हर फूल को गुलशन में महकने की दुआ दो,

रास्ते जो हमेशा सहल ढूँढ़ते है…

raste jo hamesha sahal dhoondhte hai

रास्ते जो हमेशा सहल ढूँढ़ते है हो न हो वो सराबो में जल ढूँढ़ते है, जब भी लगता

आज जो तुम्हारी नज़र में एक तवायफ़ सी है वो…

आज जो तुम्हारी नज़र में एक तवायफ़ सी है वो तुम्हारी ही तो बनाई हुई बेअदब रिवायत सी

हर क़दम कहता है तू आया है जाने के लिए…

har qadam kahta hai tu aya hai jaane ke liye

हर क़दम कहता है तू आया है जाने के लिए मंज़िल ए हस्ती नहीं है दिल लगाने के

ख़राब लोगो से भी रस्म ओ राह रखते थे…

kharab logo se bhi rasm o raah rakhte the

ख़राब लोगो से भी रस्म ओ राह रखते थे पुराने लोग गज़ब की निगाह रखते थे, ये और

सिखाया जो सबक़ माँ ने वो हर पल निभाता हूँ…

sikhaya jo sabaq maa ne wo har pal nibhata hoo

सिखाया जो सबक़ माँ ने वो हर पल निभाता हूँ मुसीबत लाख आये सब्र दिल को सिखाता हूँ,

खुल के मिलने का सलीक़ा उन्हें आता नहीं…

khul kar milne ka saliqa unhe aata nahi

खुल के मिलने का सलीक़ा उन्हें आता नहीं और मेरे क़रीब तो कोई चोर दरवाज़ा नहीं, वो समझते

अशआर मेरे यूँ तो ज़माने के लिए हैं…

kuch ashaar mere yun to zamane ke liye hai

अशआर मेरे यूँ तो ज़माने के लिए हैं कुछ शेर फकत उनको सुनाने के लिए हैं, अब ये

कोई चेहरा न हुआ रोशन न उजागर आँखें…

koi chehra na hua raushna na ujagar

कोई चेहरा न हुआ रोशन न उजागर आँखें आइना देख रही थीं मेरी पत्थर आँखें, ले उड़ी वक्त