पथरा गई आँखे तेरा इंतज़ार करते करते…

pathara gai aankhe tera intzar karte karte

पथरा गई आँखे तेरा इंतज़ार करते करते टूट गए हम एक तरफ़ा प्यार करते करते, क़यामत है इज़हार

टूट कर बिखरे हुए इन्सान कहाँ जाएँगे ?

tut kar bikhre hue insan kahan jayenge

टूट कर बिखरे हुए इन्सान कहाँ जाएँगे ? दूर तक सन्नाटा है नादान कहाँ जाएँगे ? रिश्ते जो

किसे ख़बर थी हवा राह साफ़ करते हुए…

kise khabar thi hawa raah saaf karte hue

किसे ख़बर थी हवा राह साफ़ करते हुए मेरा तवाफ़ करेगी तवाफ़ करते हुए, मैं ऐसा हँस रहा

रेत भरी है इन आँखों में आँसू से तुम धो लेना…

ret bhari hai in aankho me aansoo se tum dho lena

रेत भरी है इन आँखों में आँसू से तुम धो लेना कोई सूखा पेड़ मिले तो उस से

फूल बरसे कहीं शबनम कहीं गौहर बरसे…

fool barse kahin shabnam kahin gauhar barse

फूल बरसे कहीं शबनम कहीं गौहर बरसे और इस दिल की तरफ़ बरसे तो पत्थर बरसे, कोई बादल

नज़र से गुफ़्तुगू ख़ामोश लब तुम्हारी तरह…

nazar se guftagoo khamosh lab tumhari tarah

नज़र से गुफ़्तुगू ख़ामोश लब तुम्हारी तरह ग़ज़ल ने सीखे हैं अंदाज़ सब तुम्हारी तरह, जो प्यास तेज़

न जी भर के देखा न कुछ बात की…

naa jee bhar ke dekha naa koi baat ki

न जी भर के देखा न कुछ बात की बड़ी आरज़ू थी मुलाक़ात की, उजालों की परियाँ नहाने

मुसाफ़िर के रस्ते बदलते रहे…

musafir ke raste badalte rahe muqaddar me chalna tha chalte rahe

मुसाफ़िर के रस्ते बदलते रहे मुक़द्दर में चलना था चलते रहे, कोई फूल सा हाथ काँधे पे था

एक भटके हुए लश्कर के सिवा कुछ भी नहीं…

ek bhatke hue lashkar ke siwa kuch bhi nahi

एक भटके हुए लश्कर के सिवा कुछ भी नहीं ज़िन्दगानी मेरी ठोकर के सिवा कुछ भी नहीं, आप

प्यास जो उम्र भर न बुझी पुरानी होगी…

pyas jo umr bhar naa bujhi purani hogi

प्यास जो उम्र भर न बुझी पुरानी होगी कभी तो आख़िर वो प्यास बुझानी होगी, उम्र गुज़ार दी