एक भटके हुए लश्कर के सिवा कुछ भी नहीं…

एक भटके हुए लश्कर के सिवा कुछ भी नहीं
ज़िन्दगानी मेरी ठोकर के सिवा कुछ भी नहीं,

आप दामन को सितारों से सजाए रखिये
मेरी क़िस्मत में तो पत्थर के सिवा कुछ भी नहीं,

तेरा दामन तो छुड़ा ले गए दुनियाँ वाले
अब मेरे हाथ में सागर के सिवा कुछ भी नहीं,

मेरी टूटी हुई कश्ती का ख़ुदा हाफिज़ है
दूर तक गहरे समन्दर के सिवा कुछ भी नहीं..!!

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