नसीब आज़माने के दिन आ रहे हैं

नसीब आज़माने के दिन आ रहे हैं
क़रीब उन के आने के दिन आ रहे हैं,

जो दिल से कहा है जो दिल से सुना है
सब उन को सुनाने के दिन आ रहे हैं,

अभी से दिल ओ जाँ सर ए राह रख दो
कि लुटने लुटाने के दिन आ रहे हैं,

टपकने लगी उन निगाहों से मस्ती
निगाहें चुराने के दिन आ रहे हैं,

सबा फिर हमें पूछती फिर रही है
चमन को सजाने के दिन आ रहे हैं,

चलो फ़ैज़ फिर से कहीं दिल लगाएँ
सुना है ठिकाने के दिन आ रहे हैं..!!

~फैज़ अहमद फैज़


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