तेरी आँखों ने आँखों का सिसकना भी नहीं देखा
मुहब्बत भी नहीं देखी, तड़पना भी नहीं देखा,
नहीं देखा अभी तुमने मेरी तन्हाई का मंज़र
कि अपने आप से मेरा उलझना भी नहीं देखा,
अभी तुमने तुम्हारे बिन मेरी हालत नही देखी
अभी तुमने मेरा गम बिलकना भी नहीं देखा,
अभी तुमने दुआओं में मेरे आँसू नहीं देखे
ख़ुदा के सामने मेरा सिसकना भी नहीं देखा,
अभी तुमने नहीं देख कोई मंज़र जुदाई का
अभी पत्तों का शाखों से बिखरना भी नहीं देखा…!!
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