वो हँस के देखती होती तो उस से बात करते
कोई उम्मीद भी होती तो उससे बात करते,
हम स्टेशन से बाहर आए इस अफ़सोस के साथ
वो लड़की अजनबी होती तो उससे बात करते,
हमारे जाम आधी हौसला अफ़ज़ाई कर पाए
अगर उस ने भी पी होती तो उससे बात करते
तवज्जोह से बहुत शरमाती है आवाज़ अपनी
अगर वो सो रही होती तो उससे बात करते,
किसी से बात करना इतना मुश्किल भी नहीं था
किसी ने बात की होती तो उससे बात करते,
ये ख़ामोशी भी क्या है गुफ़्तुगू की इंतिहा है
कोई बात अनकही होती तो उससे बात करते..!!
~चराग़ शर्मा
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