क्या करेंगे आप मेरे दिल का मंज़र देख कर
ख़ामखा हैरान होंगे एक समन्दर देख कर,
ये अमीरों की है बस्ती, है अलग इनका चलन
लोग मिलते है गले लोगो का पैकर देख कर,
साथ चलने का किया था आपने जब फ़ैसला
रुक गए फिर क्यूँ भला राहों में पत्थर देख कर ?
जान पाया यूँ भी होती है इबादत या ख़ुदा
रक्स करते तितलियों को कुछ गुलो पर देख कर,
आप बेशक़ ढेर सारे दोस्त रखिए ठीक है
पर भरोसा कीजिए थोड़ा संभल कर देख कर,
गर चराग़ो ने है की हर हाल में जलने की ज़िद्द
आँधियों ने पाँव भी खींचे है तेवर देख कर,
मुझसे कोई राब्ता महसूस कर ये अब्र भी
ख़ुद बरसते जा रहे है मुझको भी तर देख कर..!!
~अनुज अब्र
➤ आप इन्हें भी पढ़ सकते हैं










Discover more from Bazm e Shayari :: बज़्म ए शायरी -Hindi / Urdu Poetry, Ghazals, Shayari
Subscribe to get the latest posts sent to your email.


















