खुद ही जवाब देता खुद सवाल करता है
जमाना तेरा मेरे मौला कमाल करता है,
भूले से भी पूछ लेता है हाल ए दिल हमारा
हमको लगता है कि हमारा ख़्याल करता है,
मरने भी नहीं देता बसर करने भी नहीं देता
ये जमाना भी जीना कैसे मुहाल करता है,
जाने किस की दुआ से चल रहा है ये जहाँ
ज़माना ज़ुल्म ओ सितम बेमिसाल करता है,
हक़ बयानी की गोया खाई है कसम बशर
हर सू हर बार हर बात गोलमाल करता है..!!
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