अमीरों को मिलती है हर जगह इज्ज़त
ये ग़ुरबत हम गरीबो को कहाँ इज्ज़त पाने देती है,
झोलियाँ हमारी भरी रहती है सदा गमो से
ये ग़ुरबत हम गरीबो को कहाँ इशरत पाने देती है,
पसीने की जगह हम खून बहाया करते है
ये ग़ुरबत हम गरीबो को कहाँ उजरत पाने देती है,
टूटे फूटे घरो में गुज़रती है अपनी ज़िन्दगी
ये ग़ुरबत हम गरीबो को कहाँ आलीशान इमारत पाने देती,
दोस्ती प्यार वफ़ा सब फक़त दिखावे होते है
ये ग़ुरबत हम गरीबो को कहाँ किसी की उल्फ़त पाने देती है,
हर कोई चला जाता है यूँ ही रूठ कर दिल तोड़कर
ये ग़ुरबत हर किसी को हमारा दिल तोड़ने की इजाज़त देती है,
चंद सिक्को में बेचने को मज़बूर होती है ज़िस्मो को
ये ग़ुरबत बदनसीब औरतों को कहाँ अस्मत बचाने देती है,
ख़ुदा भी करता है रहमत फक़त अमीरों पे
ये ग़ुरबत हम गरीबो को कहाँ उसकी रहमत पाने देती है,
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