जो मिला उससे गुज़ारा न हुआ
जो हमारा था, वो हमारा न हुआ,
हम किसी और से मंसूब हुए
क्या ये नुक़सान तुम्हारा न हुआ,
बे तक़ल्लुफ़ भी वो हो सकते थे
मगर हमसे कोई इशारा न हुआ,
दोनों ही एक दूसरे पर मरते रहे
कोई भी अल्लाह को प्यारा न हुआ..!!
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ख़ुद को न ऐ बशर कभी क़िस्मत पे छोड़ तू…

अंदाज़ हू ब हू तेरी आवाज़ ए पा का था

दुनिया जिसे कहते हैं जादू का खिलौना है

बेबसी से हाथ अपने मलने वाले हम नहीं

आ निकल के मैदाँ में दो रुख़ी के ख़ाने से

आहट पे कान दर पे नज़र इस तरह न थी

न ज़रूरत है दवा की न दुआ की दोस्तों !

अब इस मकाँ में नया कोई दर नहीं करना…

फिर गोया हुई शाम परिंदों की ज़बानी

शाम से आँख में नमी सी है

















