अब इजाज़त दे कि मैं हूँ जाँ ब लब ऐ ज़िंदगी

अब इजाज़त दे कि मैं हूँ जाँ ब लब ऐ ज़िंदगी
मौत आती है बस अब हद्द ए अदब ऐ ज़िंदगी,

किस लिए अब तक जिया हूँ और क्यों ज़िंदा रहूँ
अपने होने का बता मुझ को सबब ऐ ज़िंदगी,

क्यों बनी है जान की दुश्मन मेरी मुझ को बता
तेरे पीछे मैं भला भागा हूँ कब ऐ ज़िंदगी ?

हुस्न दौलत दोस्त दुनिया दिल नज़र हर एक शय
छोड़ जाऊँगा तेरी ख़ातिर ये सब ऐ ज़िंदगी,

सोचता हूँ क्या करेगी मेरे बिन तन्हा भला
छोड़ जाऊँगा तुझे एक रोज़ जब ऐ ज़िंदगी..!!

~सबीहुद्दीन शोऐबी

मैं ने देखा है कैसा ये सपना नया रात के इस पहर

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