बच्चे की ज़िद को अब तो मेरा एतिबार दे
ऐ आसमाँ ये चाँद मेरे घर उतार दे,
चोरी करूँ तो हाथ मेरे काट दे मगर
पहले ख़ुदा ए वक़्त मुझे रोज़गार दे,
ठुकरा न दूँ मैं ग़ैर के हाथों मिली शिकस्त
मुझ को भी मेरी नस्ल ही मुजरिम क़रार दे,
यारब जुनून ए इश्क़ से महरूम रख मुझे
या मेरी वहशतों को नए रेग ज़ार दे..!!
~सलीम अंसारी
ता हद्द ए नज़र कोई भी दम साज़ नहीं है
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