मेरे उसके दरमियाँ ये राब्ता है और बस
उम्र भर एक दूसरे को सोचना है और बस,
ज़िन्दगी वायदा है मैं वापस पलट कर आऊँगा
मैं ने बस एक बार उसको देखना है और बस,
यार तूने मंज़िलों का सोच भी कैसे लिया
इश्क बस एक रास्ता है रास्ता है और बस,
खिड़कियाँ सब बंद है अहबाब सारे सो चुके
मैं हूँ या फिर एक कलंदर जागता है और बस,
रात दीवारों से सर टकरा रही है आज भी
आज भी कमरे में मैं, मैं हूँ एक दीया है और बस,
ख़्वाब ज़ादी आ कभी ख़्वाबों से हट कर भी मिले
ख़्वाब तो हैं ख़्वाब इनको टूटना है और बस,
ऐ शब ए गिर्या मेरी आँखें मुक़म्मल रो चुकी
आख़िरी एक अश्क पलकों पर खड़ा है और बस,
ज़िन्दगी सब कुछ सलामत है मेरा उसके बगैर
हाँ मगर एक दिल मेरा टूटा पड़ा है और बस..!!
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