नहीं बदलता यहाँ कुछ भी आरज़ू से फ़क़त

नहीं बदलता यहाँ कुछ भी आरज़ू से फ़क़त
नहीं बदलता यहाँ कुछ भी जुस्तजू से फ़क़त,

मुझे यक़ीन है हमारा जहाँ बदलेगा
ज़मीन बदलेगी और आसमान बदलेगा,

ये ख़ार बदलेंगे ये खारज़ार बदलेगा
सियासतों का भी कारोबार बदलेगा,

खबासतों का ये सारा ज़माना बदलेगा
फ़रेब ओ मकर का ये कारख़ाना बदलेगा,

ख़बीस लोगो का तर्ज़ ए कलाम तो देखो
ज़लील लोगो का तर्ज़ ए खराम तो देखो,

गुरूर ओ किब्र का सारा ख़ुमार उतरेगा
मुनाफिकत का ये सारा गुबार उतरेगा,

सुराही बदलेगी मीना ओ जाम बदलेगा
नज़र ये आता है सारे गुलाम बदलेंगे,

ये साक़ी बदलेगी ये इंतज़ाम बदलेगा
मुझे यकीं है कि सारा निज़ाम बदलेगा,

जो सुर फूँका है तेरे लहू ने ऐ नवाब
जो नूर फैला है तेरे कलम से ऐ नवाब

मुझे यकीं है ये ज़ुल्मत को दूर कर देगा
ये फ़ैलती हुई वहशत को दूर कर देगा,

किसी भी रात उनको सुकूँ नहीं मिलना
किसी भी बात से सोज़ ए दरूँ नहीं मिटना,

किसी भी पहलू से उनके लिए क़रार नहीं
कोई बहार भी अब उनके लिए बहार नहीं,

खुदाया उसको तो अब ज़िंदगी नहीं मिलनी
हमें भी अब कहीं आसूदगी नहीं मिलनी,

जो उसके हक़ मे उठे हाथ उनको देख ज़रा
कि किस ने किस का दिया साथ उनको देख ज़रा,

उठा है लोगो का जम्म ए गफ़ीर देखो तो
अभी तो जागा है उनका ज़मीर देखो तो..!!


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